सिनेप्रेमियों के लिए जिले की शान रहे बेगूसराय के सावित्री चित्रपट का पर्दा हमेशा के लिए बंद हो गया !

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बेगूसराय के सावित्री सिनेमा हॉल का पर्दा हमेशा के लिए बंद हो गया ।

आ गया आपके शहर बेगूसराय में पहली बार : सावित्री चित्रपट में ५ शो में – आप आईये , अपने परिवार दोस्तों को भी लेकर आईये !

इस अनाउंसमेंट को करते हुए जब सावित्री हॉल के पोस्टर से सजा रिक्शा बगल से गुजरता था तो बचपन में हमने भी उस रिक्शे के पीछे दौर लगायी है । हे हो चाचा ..एगो पम्पलेट हमरो दहो न ..और तब तक पीछे पीछे बच्चे लोग चलते थे जब तक की सिनेमा का एक दो पोस्टर हाथ न लग जाता हो। हाँ जी , आपके शहर बेगूसराय का सावित्री चित्रपट पर अब ताला लग गया है । आज के ही खबर के अनुसार हॉल प्रबंधन ने लगातार चल रहे घाटे की वजह से ये निर्णय लिया ।

ऐसी हर वो चीज जिससे आपके बचपन की यादें जुडी हो , वो खास ही लगती है ।

बहुत छोटा था जब पापा मम्मी भाई के साथ पहली बार गंगा यमुना सरस्वती सिनेमा ,सावित्री हॉल में पहली बार देखने गए थे ।इतने छोटे थे की सीट पर बैठने के बाद पैर हवा में ही झूल रहा था 🙂  वो तो बाद में पता चला की पापा ने दरियादिली दिखाई थी वर्ना इतने छोटे बच्चे को इतनी आजादी मिलती नहीं थी , माँ के गोद में ही चुप चाप से ज्यादा तैं- भैं किये बिना बैठकर देखिये और घर जाईये..टिकट पर सीट नंबर हुआ करता था..जो अंदर टॉर्च वाले चाचा जी टिकट देखकर टॉर्च लाइट फोकस सीट पर मारकर बता दिया करते थे कि कहाँ बैठना है ।..उसके बाद धुंधली यादों में जिगर , जानवर, भगत सिंह और भी कई फिल्म, हाल फिलहाल में दंगल भी देखा है ।

मल्टीप्लेक्स के इस दौर में इस हॉल का बंद होना मेरे लिए कोई खास आश्चर्य की बात नहीं है । बदलते वक़्त के साथ सिस्टम का अपग्रेड जरुरी भी हो जाता है ..इस बार भी अपने अवकाश में एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर सिनेमा देखने का प्लान बनाते रह गए …अलका सिनेमा में जाकर उरी देख आये थे । अब अफ़सोस हो रहा है की काश ये अंतिम सिनेमा भी देख ही लेते ..मेरे लिए बेगूसराय के हॉल में सिनेमा देखना , देखने से ज्यादा एक्सपीरियंस लेने जैसा है । आवाज और परदे की क्वालिटी की ये हालत है की शायद ही आप कुछ स्पष्ट सुन और समझ पाए , लेकिन इन्तजार था की कब हाफ टाइम हो और पेप्सी बेचने वाला अपने हाथ में रखे बोतल पर ओपनर को चलाते हुए…एक अजीब सा साउंड किर्र किर्र निकालते हुए आ जाये..उस आवाज को सुनना और सुनकर मुस्कुराना ही अपने आप में संतोषजनक था 🙂

ये सिर्फ एक सिनेमा हॉल ही नहीं एक लैंडमार्क , एक पहचान था बेगूसराय का । 

2017-02-02

बताया जाता है कि 1984 में मार-धार से भरपूर धर्मेंद्र , मिथुन , डैनी अभिनीत फिल्म जागीर से इस हॉल कि शुरुआत हुई थी । पिछले तीन दशक से जिलेवासियों के दिलो पर राज कर रहा और सिनेप्रेमियों के लिए जिले की शान रहे सावित्री सिनेमा हॉल में अब फिल्में देखना अतीत का हिस्सा बनकर रह जायेगा ।

ज्ञातव्य हो की 1945 में स्थापित बुढ़िया हॉल ( श्री कृष्णा चलन्तिका ) घाटे के कारण 2005 में बंद हुआ , उसके बाद अमरदीप व् विष्णु सिनेमा हॉल में भी ताला लग गया ।

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A reversion to childhood memory watching Uri: The Surgical Strike at Alka Cinema.

विकास रंजन
टोक्यो , जापान
लोहियानगर , बेगूसराय

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