घर की परंपरा कभी ख़त्म न होई !

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देश सेवा के साथ अपने घर के परम्पराओं का निर्वाह करने में फौजी भी पीछे नहीं रहते । लोहियानगर बेगूसराय निवासी लेफ्टिनेंट कमांडर सुभाष रंजन और उनकी पत्नी डिप्टी कमांडेंट राधिका भी इस बार पहली बार छठ पूजा मनाने घर आये है ।

सुभाष रंजन जो सैनिक स्कूल तिलैया से NDA क्वालीफाई करके अभी वर्तमान में इंडियन नेवी में लेफ्टिनेंट कमांडर और उसकी पत्नी राधिका जो मूलतः जोधपुर राजस्थान से है और वो भी इंडियन कोस्ट गार्ड में डिप्टी कमांडेंट के पोस्ट पर केरल में कार्यरत है ।

डिप्टी कमांडेंट राधिका एवं लेफ्टिनेंट कमांडर सुभाष की यह पहली छठ काफी खास रही ।प्रकृति का दुलारा और बिहारियों का सबसे प्यारे महापर्व छठ पूजा के बारे में राधिका अपने अनुभव के बारे में बताती है की कैसे इस पर्व ने उसे इस बात का भलीभांति एहसास कराया की घर की परंपरा , रीति रिवाज क्या होती है । उसके नजरिये में छठ एक सांस्कृतिक एवं पारिवारिक महापर्व है जिसमे पूरे परिवार की सहभागिता आवश्यक है ।

एक ऐसा महापर्व जिसमे रिश्ते , समाज आदि को बचाने की कवायद नही होती महती कारक होता है अपनी प्राकृतिक माँ को बचाने की । वो काफी आश्चर्य करते हुए बताती है कि किसी पंडित या कर्मकांडी व्यवस्था ही नही थी इस पूजा में । शारीरिक , मानसिक , अध्यात्मिक एवं सामाजिक सुचिता से भरा यह छठ पर्व का अनुभव काफी अलग एवं मनमोहक रहा ।

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सुबह के अर्घ्य के बाद प्रसाद खाकर अभी से ही अगले साल छुट्टी अप्लाई करने की बात कर रहे है । सुभाष और राधिका की माने तो तो ये एक जीवन और सांस की परंपरा जैसी है । अगर छठ की परंपरा छुटी तो अपनो का अपनापन छूटा।

आप सभी को छठ महापर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं ।

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